Tuesday, September 10, 2019

Tuesday, August 13, 2019

अपनें बच्चे का आत्मविश्वास कैसे बढायें ?

बच्चों द्वारा प्राप्त की गयी उच्च उपलब्धियों तथा उनकी बढ़ी हुयी कार्यक्षमता के अध्ययन से ज्ञात होता है कि  अन्य बातो के रहते हुए भी नब्बे प्रतिशत मामलो में  बच्चों कि उच्च क्षमता  कारण उनका बढ़ा हुआ आत्मविश्वास ही होता है | अतः माता पिता व अभिभावकों का यह परम कर्तव्य हो जाता है कि हम उनके आत्मविश्वास को हमेशा ऊंचा रखने का  अनवरत प्रयत्न करते रहें| इसके लिए बाल- मनोविज्ञान को  भी जानना  जरुरी  है क्योंकि बच्चे वैसे नही सोचते जैसे कि उनके अभिभावक या माता पिता | अपने बच्चों  में आत्मविश्वास की कमी न आने पाए इसके लिये हम निम्नलिखित उपायों का सहारा ले सकते है -

  • अपने बच्चे के मनोविज्ञान या उसके सोचने कि दिशा को समझने के लिए उसके साथ कुछ समय बिताया जाना या बातें करते रहना आवश्यक है इससे आपको अपने बच्चे के सोचने की सकारात्मक या नकारात्मक शैली का पता आसानी से चल सकेगा | यदि  उसका चिंतन नकारात्मक है या रचनात्मक नही है तो सावधानिपुर्वक सोचने कि आवश्यकता है कि किन परिस्थितियों के कारण उसका चिंतन नकारात्मक दिशा में जा रहा है ? उन कारणों पर  तत्काल निर्णय लिये जाने कि आवश्यकता है क्योंकि आपके बच्चे में आत्मविश्वास कि कमी पाये जाने कि सम्भावना अधिक है |
  • आत्मविश्वास कि कमी वाले बच्चों को हतोत्साहित करने वाले वातावरण से अलग रखने का उपाय करें  और उसे प्रोत्साहित करने वाली कहानियाँ या फिल्में दिखाये |
  • अपनें बच्चे की  पढाई या टास्क  को छोटे टुकडों या लक्ष्यों में बाँट दें जो उसके लिए आसान हो, बच्चा जैसे जैसे इन छोटे लक्ष्यों को प्राप्त करता जायेगा वैसे वैसे उसका आत्मविश्वास बढ़ता चला जायेगा | यहाँ आप  बच्चे का के लक्ष्यप्राप्ति का कुछ न कुछ लेवल तय कर लें और हर लेवल पर पहुँचने पर उसे सेलिब्रेट करे और हो सके तो उपहार भी दे |
  • यदि आपका बच्चा प्रयत्न के बाद भी निर्धारित लेवल तक नही पहुँच पाता है तो निराश नहीं हो बल्कि उसे धैर्यपूर्वक कमियों को इंगित करे ,उसके साथ दोस्त जैसा व्यवहार करे ,इससे उसका खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आयेगा |
  • जब कभी आपको अपनें बच्चे कि बुराई का पता चले तो उस पर उबल पड़ने कि जगह जरा संयम और बुद्धिमानी से  काम लें |उसे एकदम से बुरा मानने से उसके अंतर्मन में यह बात बैठ सकती है कि सब उसे बुरा ही मानते है अगर ऐसा होता है तो उसका आत्मविश्वास एकदम से नीचे गिर सकता है|  बजाय इसके उसे विश्वास में लेकर यह कहे कि इसमें तुम्हारा ही केवल दोष नहीं था मै भी होता तो शायद यह करने कि कोशिश करता ,परन्तु तुम एक समझदार बच्चे हो तुम्हे सोचना चाहिए कि ऐसा करके कुछ लोग तुम्हें बदनाम तो नहीं करना चाह रहें |
  • आप अपने बच्चे के सबसे अच्छे कौंसिलर आप स्वयं हो सकते है यदि आपको उसका विश्वास जितने आता हो अतः यह आवश्यक है कि आप अपने बच्चे के विचारों को खुले मन से लें |अपने विचार उस पर सिर्फ़  इसलिये न थोपे कि इससे आपका नाम ऊँचा होगा और प्रतिष्ठा मिलेगी बल्कि उसकी रूचियो का भी पूरा ख्याल रखें |
  • एक अभिभावक होने के नाते सबसे अहम् बात यह है कि बच्चे कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिये उसकी शारीरिक व मानसिक क्षमता के अनुरूप ही लक्ष्य दिया जाना चाहिये क्योकि रुचि के विपरीत कार्य आत्मविश्वास को बढ़ाने में बिलकुल मदद नहीं करते , उसका उत्साह  भी जाता रहता है |
  • अपनें बच्चे कि तुलना कभी भी किसी अन्य से न करे क्योंकि यह बात बच्चे के मनोविज्ञान के हिसाब से बिलकुल फिट नही बैठती | बार बार तुलना करने से बच्चा हीन भावना का शिकार हो सकता है या डिप्रेसन में जा सकता है |
  • उपरोक्त बातें बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है ,इन बातों का घ्यान रख आप अपने बच्चे के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा सकते हैं |

Debate on 'One nation _ One Election

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